कर्नाटक में मुस्लिमों को 4% आरक्षण: विधानसभा में हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक

दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा में सरकारी ठेकों में मुसलमानों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पारित हो गया। यह विधेयक हनी ट्रैप घोटाले को लेकर मचे बवाल के बीच पारित हुआ, जिससे विपक्षी भाजपा ने कड़ा विरोध जताया।

भाजपा ने विधेयक को बताया असंवैधानिक

भाजपा ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार हनी ट्रैप घोटाले पर चर्चा करने के बजाय मुस्लिम कोटा विधेयक पेश कर रही है। विरोध के दौरान भाजपा विधायकों ने विधानसभा में नारेबाजी की, स्पीकर की सीट पर चढ़ गए और विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं।

सामाजिक न्याय का हवाला देकर कांग्रेस ने किया बचाव

सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधेयक को अल्पसंख्यकों के लिए सामाजिक न्याय और आर्थिक अवसर बढ़ाने वाला बताया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों को सरकारी ठेकों में समान अवसर प्रदान करेगा।

किसे मिलेगा आरक्षण?

कैबिनेट ने ‘कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (संशोधन) विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी, जिसमें निम्नलिखित आरक्षण प्रावधान किए गए हैं:

2 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्यों में 4% ठेके मुसलमानों के लिए आरक्षित।

1 करोड़ रुपये तक की माल/सेवा खरीद अनुबंधों में 4% आरक्षण।

वर्तमान में एससी/एसटी (24%), श्रेणी-1 (4%) और श्रेणी-2ए (15%) के लिए भी आरक्षण मौजूद है।

भाजपा विधेयक को देगी कानूनी चुनौती

भाजपा ने घोषणा की है कि वह इस विधेयक को अदालत में चुनौती देगी, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही, पार्टी ने केंद्र सरकार से तुष्टिकरण की राजनीति को रोकने के लिए कानून बनाने की अपील की है।

हनी ट्रैप कांड का विवाद भी रहा केंद्र में

इस विधेयक के पारित होने के दौरान हनी ट्रैप घोटाले का मुद्दा भी गरमाया रहा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में 48 राजनेता शामिल हैं और सरकार इस पर चर्चा से बच रही है। विपक्ष ने इसे एक बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताया।

विधानसभा में हंगामे के बीच पारित इस विधेयक को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है और आने वाले दिनों में यह बड़ा विवाद बन सकता है।

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