दैनिक सांध्य बन्धु नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के मढ़ई क्षेत्र में हाल ही में वन्यजीवों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। एक ओर, जहां बाघ और तेंदुए की लड़ाई में तेंदुए की मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक से लाई गई 13 वर्षीय हथिनी पूजा भी बीमार पड़ गई।
हथिनी पूजा की हालत में सुधार
रविवार रात से हथिनी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसका इलाज जारी है। भोपाल से वाइल्डलाइफ डॉक्टर प्रशांत देशमुख और एसटीआर के डॉक्टर गुरुदत्त शर्मा इलाज के लिए मढ़ई पहुंचे। अधिकारियों के अनुसार, पूजा की हालत में अब सुधार हो रहा है, लेकिन उसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
जांच के लिए सैंपल जबलपुर भेजे गए
हथिनी को दस्त की समस्या हो रही थी, जिसके कारण उसकी स्थिति बिगड़ी। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि इलाज के साथ-साथ, बीमारी के कारणों की जांच के लिए सैंपल जबलपुर की लैब भेजे गए हैं।
बाघ से संघर्ष में तेंदुए की मौत
रविवार सुबह मढ़ई में एक तेंदुआ मृत अवस्था में मिला। उसकी गर्दन और पीठ पर गहरे घाव के निशान थे। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह घाव किसी बाघ के हमले के कारण हुए हैं, जिससे तेंदुए की मौत हो गई।
एसटीआर में कुल 9 हाथी
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कुल 9 हाथी हैं, जिनमें से लक्ष्मी और सिद्धनाथ तीन वर्षों से कुनो नेशनल पार्क में हैं। बाकी 7 हाथियों में से चार हाथी दो साल पहले कर्नाटक से लाए गए थे, जिन्हें स्थानीय महावतों के प्रशिक्षण के बाद मढ़ई हाथी कैंप में रखा गया है।
हाल ही में हुए इन घटनाक्रमों से एसटीआर के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है, और वे लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
Advertisement