दैनिक सांध्य बन्धु भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस बीते कुछ वर्षों से संघर्ष कर रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद संगठन में अस्थिरता देखी गई। अब पार्टी एक नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में 3 अप्रैल को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है, जिसमें बड़े बदलावों की योजना पर चर्चा होगी।
बैठक में कौन-कौन रहेगा शामिल?
इस अहम बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। सभी जिला अध्यक्षों को भी इसमें बुलाया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठन को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए जाएंगे।
संभावित बदलाव
सूत्रों के अनुसार, संगठन में सुधार के लिए कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
जिला अध्यक्षों को अधिक अधिकार: अब जिला स्तर के फैसले स्थानीय नेतृत्व खुद ले सकेगा।
पार्टी ऑफिस की स्थापना: कांग्रेस कार्यालय किसी नेता के घर से नहीं, बल्कि एक आधिकारिक स्थान से संचालित होंगे।
सीधे आलाकमान से संपर्क: जिला अध्यक्षों को दिल्ली के नेतृत्व से सीधा संवाद करने की सुविधा मिलेगी।
टिकट वितरण में भूमिका: आगामी चुनावों में जिला अध्यक्षों की राय को अधिक महत्व मिलेगा।
नए चेहरों को मौका: ऐसे लोगों को जिला अध्यक्ष बनाया जाएगा, जो खुद चुनाव लड़ने की इच्छा न रखते हों।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें प्रमुख रूप से गुटबाजी, नेताओं का पार्टी छोड़ना और संगठन में कमजोरी शामिल हैं। यह बैठक कांग्रेस के लिए अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने का एक बड़ा अवसर है।
अब सवाल यह है कि क्या ये बदलाव कांग्रेस को मजबूती देंगे या केवल कागजी योजनाएं बनकर रह जाएंगे? इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।