न्यू लाइफ हॉस्पिटल अग्निकांड: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार लगाई फटकार, जांच रिपोर्ट दो हफ्ते में सौंपने के निर्देश

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। अगस्त 2022 में जबलपुर के न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की मौत के बाद भी जांच अधूरी है। मामले में हो रही देरी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है और निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की जाए।

हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

गुरुवार को चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अग्निकांड की हाई-लेवल जांच कमेटी की रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जाए। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जबलपुर में कई अस्पताल नियमों की अनदेखी कर संचालित किए गए थे, जिनका संचालन स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से हो रहा था।

नियमों की अनदेखी से हुआ हादसा

याचिका में बताया गया कि अस्पतालों को बिना नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी, और बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट की जांच के लाइसेंस जारी किए गए थे। अग्निकांड के दौरान अस्पताल में आपातकालीन द्वार नहीं होने के कारण लोग बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौत हो गई।

अस्पतालों पर कार्रवाई, लेकिन जांच अधूरी

याचिका पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जबलपुर के कई अस्पतालों पर कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से पेश दस्तावेजों में बताया गया कि कोठारी अस्पताल और एप्पल अस्पताल के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। लेकिन, न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट अब तक पुलिस को नहीं सौंपी गई है।

दोषियों को आरोपी बनाने के निर्देश

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अस्पताल को पंजीयन जारी करने वाले अधिकारियों डॉ. एल.एन. पटेल और डॉ. निशेष चौधरी को पुलिस ने अब तक आरोपी नहीं बनाया है। जबकि जांच कमेटी ने उन्हें दोषी पाया था। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि जांच रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों को आरोपी बनाया जाए।

अगली सुनवाई 17 अप्रैल को

हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर के सभी नियम विरुद्ध अस्पतालों की अद्यतन रिपोर्ट दो सप्ताह में पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी, जिसमें अदालत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

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