दैनिक सांध्य बन्धु लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक साक्षात्कार में खुद को राजनीति से ऊपर एक योगी बताते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए राजनीति कोई 'फुल टाइम जॉब' नहीं है, बल्कि वे असल में एक योगी हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुसलमानों को राज्य के विकास में भागीदार बनना चाहिए, न कि सिर्फ अल्पसंख्यक होने के कारण विशेष रियायतों की अपेक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने या अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएम योगी ने साफ किया कि यदि कोई अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे 'बुलडोजर न्याय' का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना उनकी प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वक्फ बोर्ड लूट-खसोट के अड्डे बन गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि हिंदू मंदिर और मठ शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देते हैं, लेकिन क्या वक्फ बोर्ड ने इसी प्रकार समाज कल्याण के लिए कार्य किया है? उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्डों का मुख्य उद्देश्य अवैध कब्जे को बढ़ावा देना बन चुका है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है।
अपने कार्यकाल और भविष्य की राजनीति पर बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति उनकी 'फुल टाइम जॉब' नहीं है, लेकिन फिलहाल उन्हें राज्य की सेवा करने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सभी को समान अधिकार मिल रहे हैं और मुसलमानों को भी सरकारी योजनाओं में उचित हिस्सा मिल रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि राज्य में मुस्लिम आबादी 20% है, लेकिन सरकारी योजनाओं के 35-40% लाभार्थी मुस्लिम समुदाय से हैं। उन्होंने किसी भी प्रकार के भेदभाव या तुष्टीकरण की राजनीति को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार सुशासन और न्याय की नीति पर चल रही है।
योगी आदित्यनाथ के इन बयानों से साफ है कि वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी स्पष्ट विचारधारा और फैसलों पर अडिग हैं। उनका मानना है कि कानून-व्यवस्था और समान विकास ही प्रदेश की प्राथमिकता होनी चाहिए।