News Update: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश, संसद पर भी दावे का मुद्दा गर्माया

दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह विधेयक प्रस्तुत किया, जिसमें 123 सरकारी संपत्तियों को वक्फ को देने के पुराने फैसले पर सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि "अगर यह संशोधन नहीं लाया जाता तो संसद भवन भी वक्फ के दावे में आ सकता था।"

NDA को समर्थन, विपक्ष ने जताया विरोध

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बिल का समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस, DMK, BJD और BRS समेत विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है। विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की, जिस पर रिजिजू ने कहा कि "देश को यह जानने का हक है कि कौन किस पक्ष में है।"

विरोध और समर्थन में बयानबाजी तेज

1. तमिलनाडु में AIADMK समेत कई दलों ने बिल के खिलाफ मोर्चा खोला।

2. भोपाल में मुस्लिम महिलाओं ने बिल के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

3. कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।

4. अखिलेश यादव ने कहा कि BJP में दिखाने की होड़ मची है कि कौन ज्यादा सख्त हिंदू है।

विवाद के केंद्र में क्या है वक्फ बिल?

इस संशोधन के जरिए सरकार वक्फ संपत्तियों के दावों की पारदर्शिता बढ़ाने और पुरानी सरकारी जमीनों को वक्फ से मुक्त कराने का प्रयास कर रही है। JPC की रिपोर्ट के अनुसार, "देश में वक्फ की 5 लाख से ज्यादा संपत्तियां हैं, जिनमें कई मामलों में स्वामित्व को लेकर विवाद हैं।"

यूपी में पुलिस की छुट्टियां रद्द, विपक्षी नेता नाराज

उत्तर प्रदेश में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल को सतर्क किया गया है और छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। AIMPLB और अन्य मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के विरोध में ईद पर काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने का ऐलान किया था।

संसद में बिल पर वोटिंग के आसार, मजबूत स्थिति में सरकार 

अगर वोटिंग होती है, तो NDA के पास बहुमत के आंकड़े हैं, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्षी खेमे में मतभेद भी सामने आ रहे हैं, जिससे सरकार के पक्ष में माहौल बन सकता है।

वक्फ संशोधन बिल पर देशभर में तीखी बहस जारी है। सरकार का कहना है कि यह बिल "पारदर्शिता और न्याय" की दिशा में एक बड़ा कदम है, जबकि विपक्ष इसे "धार्मिक हस्तक्षेप" के रूप में देख रहा है। अब देखना होगा कि यह विधेयक संसद से पारित होता है या नहीं।

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